तीन दिवसीय आध्यात्म विज्ञान गीता ज्ञान यज्ञ नगर के शीतला मंदिर मे हुआ आयोजित

अंतागढ़ : दिनांक 24/25/26 फरवरी तीन दिवसीय कार्यक्रम में जगत गुरू स्वामी उमाशंकर चैतन्य, अखिल भारतीय केन्द्रीय विज्ञान शाल ओंकारेश्वर के अध्यक्षता में आध्यात्म विज्ञान गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन शीतला मंदिर प्रांगण अन्तागढ़ में किया गया, इस कार्यक्रम में सनातन धर्म के मूलभूत सिद्धांत विश्व ही विश्वरूप परमात्मा है, जिसका प्रमाण श्रीमद्भागवत गीता एवं रामचरित मानस वेद उपनिषद इत्यादि ग्रंथो में उल्लेख है, दिया गया इसे जानने के लिये मानक मात्र के पास स्वयंभू आठ साधन है, आंख, कान, नाक, त्वचा, जिव्हा, छटवां साधन मन सातवी बुद्धि एवं आठवां जीव जान है, इन्हीं साधनों के माध्यम से विश्वरूप परमात्मा का प्रत्यक्ष दर्शन कराया गया, इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख उपदेशक आचार्यगण राजेन्द्रानंद जी इंदौर, अवधेशानंद जी धार, राजेन्द्र क्षत्री जी, मध्यप्रदेश समघार, प्रेमानंद जी, हथनीकला, मुंगेली, रमेश ठाकुर जबलपुर, सखाराम, महाराष्ट्र अकोला, मूलचंदजी साहू, गुरूजी पाऊवारा, भोलाराम जी साहू, उमरपोटी, मदनलाल साहू उरला, प्रताप स्वर्णकारे बिलासपुर, रमेश सोनी भिलाई, सुरेश सोनी सोनपुरी, इस कार्यक्रम के संजोयक श्री मूलचन्द जी गुरूजी एवं विश्वरूपानंदजी थे, एवं प्रमुख आयोजक श्री बाबूलाल जी साहू एवं विष्णु प्रसाद उइके अन्तागढ़ थे ।

अंकालूराम पवार एवं सुनील ठाकुर, विक्रम सिंह गंगेल, राकेश समरथ, जयराम साहू, संजय ध्रुव, बेदू राम, लक्ष्मीनाथ प्रधान व सभी क्षेत्रीय विज्ञानमंडली के सदस्यगण उपस्थित रहें । इस कार्यक्रम में विज्ञानशाला पाऊवारा, उमरपोटी, चिंगरी, खुर्सीपार, भिलाई, रायपुर, उरला, दुर्ग, बोरीगार के सभी सदस्यगणों की सहयोग एवं उपस्थिति रही । उक्त कार्यक्रम के द्वारा मानव समाज में फैली ईश्वर और धर्म के संबंध में फैली भ्रांतियों, अंधविश्वास, रूढ़ीवाद को समाप्त कर मानवीय एकता एवं प्रेम स्थापित करने अखंड सुख शांति स्थापित करने का संदेश दिया गया । और श्रीमाद भागवत गीता में उल्लेखित द्वियदृष्टि द्वारा विश्वरूप परमात्मा को जानकर आचरण करने की प्रेरणा दी गई ।

