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गुबराल बांध निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने कसी कमरगांव-गांव बैठकों का दौर शुरू, मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी


अंतागढ़।
क्षेत्र में वर्षों पुरानी गुबराल बांध निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसे लेकर ग्रामीणों ने कमर कस ली है और गांव-गांव में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। इस क्रम की शुरुआत आज ग्राम कामता से हुई, जहां क्षेत्र के किसान, सरपंच एवं गांव प्रमुख बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में गुबराल नदी पर बांध निर्माण के लिए रणनीति तैयार करना रहा। इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी समय में एक समिति का गठन किया जाएगा तथा पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही प्रत्येक गांव में इस विषय पर लगातार बैठकें आयोजित कर जनसमर्थन बढ़ाया जाएगा।


स्कूल प्रांगण में पेड़ की छांव तले आयोजित इस बैठक में किसानों ने शासन-प्रशासन तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए ज्ञापन सहित अन्य माध्यमों का सहारा लेने का निर्णय लिया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो वे चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। बैठक में किसानों ने हर वर्ष होने वाली जल संकट की समस्या को गंभीरता से उठाया। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र पूरी तरह कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण किसान केवल वर्षा पर निर्भर रहते हैं। बारिश अच्छी होने पर फसल ठीक होती है, लेकिन कम बारिश होने पर पूरी फसल चौपट हो जाती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में जलस्तर भी लगातार गिरता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। यदि गुबराल नदी पर बांध का निर्माण हो जाता है तो न केवल जलस्तर में सुधार होगा, बल्कि सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वर्तमान में पानी की कमी के कारण केवल खरीफ फसल ही ली जा रही है, जबकि रबी सीजन में अधिकांश खेत खाली पड़े रहते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि बांध निर्माण होने से किसान खरीफ के साथ-साथ रबी फसल भी ले सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पूरा क्षेत्र समृद्धि की ओर अग्रसर होगा।