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अंतागढ़ में डॉ. आंबेडकर जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, भव्य शोभायात्रा से दिया सामाजिक एकता का संदेश

​अंतागढ़ | संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर मंगलवार, 14 अप्रैल को अंतागढ़ में सर्व समाज के तत्वाधान में भव्य एवं गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर ‘जय भीम’ के नारों से गुंजायमान रहा और चारों ओर उत्साह का माहौल देखने को मिला।


​दीप प्रज्वलन व ध्वजारोहण से हुआ शुभारंभ
​कार्यक्रम की शुरुआत नया पारा स्थित आंबेडकर भवन में हुई। यहाँ समाज के प्रमुखों और नागरिकों ने भगवान गौतम बुद्ध एवं बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात गरिमामयी वातावरण में ध्वजारोहण की रस्म अदायगी की गई।


​निकाली गई विशाल शोभायात्रा
​अंबेडकर भवन से डीजे की धुन और गाजे-बाजे के साथ एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें समाज के युवा, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में नीले साफे और झंडे लेकर शामिल हुए। यह शोभायात्रा नया पारा से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्ग गोल्डन चौक होते हुए डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा स्थल तक पहुंची। पूरी यात्रा के दौरान लोग बाबासाहेब के जयकारे लगाते हुए सामाजिक एकता और समानता का संदेश देते रहे।


​प्रतिमा स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि
​नगर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करते हुए शोभायात्रा प्रतिमा स्थल पहुंची, जहाँ विधिवत पूजा-अर्चना की गई। यहाँ उपस्थित जनसमूह ने बाबासाहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने इस अवसर पर डॉ. आंबेडकर के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिखाए गए शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो के मार्ग पर चलकर ही समाज का सर्वांगीण विकास संभव है।


​प्रमुख जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
​इस ऐतिहासिक आयोजन में क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। जिनमे मुख्य रूप से ​अनूप नाग (पूर्व विधायक) ​बिरसींग उसेंडी, संत राम सलाम, हीरालाल मांझी, ​सुभद्रा सलाम, घनश्याम रामटेके , मनोरमा मंडावी ​बद्रीनाथ गावड़े, तरुण खापर्डे, कुलदीप खापर्डे, ​लक्ष्मण ठाकुर अमल सिंह नरवास और राकेश गुप्ता सहित सर्व समाज की महिला पुरूष व बच्चे भारी संख्या में उपस्थित रहे।


​खीर-पुड़ी का वितरण और समापन
​कार्यक्रम के अंत में समाज द्वारा उपस्थित सभी लोगों के लिए खीर-पुड़ी का वितरण (भंडारा) किया गया। आयोजन को सफल बनाने में सर्व समाज के कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। यह पूरा आयोजन न केवल उत्सव का प्रतीक रहा, बल्कि इसने क्षेत्र में सामाजिक समरसता और भाईचारे की एक प्रेरणादायी मिसाल पेश की।