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राजस्थान का पारंपारिक उत्सव गणगौर का नगर में धूम

अंतागढ़ : राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति में विशेष महत्व रखने वाला उत्सव गणगौर नगर मे भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। नगर में निवासरत राजस्थानी मूल की महिलाओं व बच्चों द्वारा प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी पूरे रस्मो-रिवाज के साथ इस उत्सव में भाग ले रहे हैं।

बता दें कि यह त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गणगौर का संबंध भगवान (ईसर) और माता (गौरी) से है, जो वैवाहिक सुख, प्रेम और सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं। इस उत्सव की प्रमुख विशेषता गुड्डा-गुड़िया (ईसर-गौरी) के पुतलों का निर्माण और उनकी पूजा है। महिलाएं मिट्टी या लकड़ी से इन पुतलों को बनाकर उन्हें रंग-बिरंगे वस्त्रों और आभूषणों से सजाती हैं। यह परंपरा दांपत्य जीवन की मधुरता और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

गणगौर पर्व होली के दूसरे दिन से प्रारंभ होकर लगभग 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान महिलाएं प्रतिदिन पूजा-अर्चना करती हैं। कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं, वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पर्व के दौरान पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं और महिलाएं सामूहिक रूप से इस उत्सव में भाग लेती हैं।
उत्सव के अंतिम दिन सुसज्जित ईसर-गौरी की प्रतिमाओं की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होती हैं। इसके पश्चात इन पुतलों का जल में विसर्जन कर उत्सव का समापन किया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।