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थाना प्रभारी पर आदिवासी ग्रामीणों से मारपीट व फर्जी एनकाउंटर की धमकी देने का आरोप

अंतागढ़। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा थाना प्रभारी टी.आई. निर्मल जांगड़े पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के ग्रामीणों के साथ मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और फर्जी एनकाउंटर की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है। इस संबंध में ग्राम तुरसनी के ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक उत्तर बस्तर कांकेर को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। आवेदन के अनुसार ग्राम तुरसनी निवासी पिताम्बर ध्रुव (ग्राम प्रमुख), परमेश्वर ध्रुव (पूर्व सरपंच) और विरेंद्र बघेल (गायता) ने बताया कि 8 मार्च 2026 की शाम लगभग 4:30 बजे वे लोग इरपाई-कनगोटा साप्ताहिक बाजार से वापस अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान बाजार क्षेत्र में स्थित एक दुकान के पास कोयलीबेड़ा थाना प्रभारी टी.आई. निर्मल जांगड़े अपने एक बीएसएफ जवान के साथ सिविल ड्रेस में मौजूद थे। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना प्रभारी ने उन्हें रोककर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जातिसूचक गालियां दीं और बिना किसी कारण के मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान परमेश्वर ध्रुव का कॉलर पकड़कर उन्हें घसीटा गया और जान से मारने का प्रयास भी किया गया। स्थिति बिगड़ने पर वे किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचाने में सफल हुए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टी.आई. जांगड़े ने ग्रामीणों को धमकाते हुए कहा कि “तुम लोग ज्यादा बोलते हो, तुम्हें फर्जी एनकाउंटर में खत्म कर दूंगा।” इतना ही नहीं, अन्य ग्रामीणों को भी पिस्तौल लहराकर धमकाने और डराने का आरोप लगाया गया है। घटना के समय मौके पर कई ग्रामीण मौजूद थे, जिनमें राजोर सलाम, सहदेव सलाम, हेमरू गावड़े और चितरंजन ध्रुव के नाम बताए गए हैं ग्रामीणों ने इसे केवल मारपीट की घटना नहीं बल्कि अनुसूचित जनजाति वर्ग पर जातीय अत्याचार और पुलिस पद व हथियार का दुरुपयोग बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि आरोपी थाना प्रभारी और संबंधित जवान के खिलाफ हत्या के प्रयास और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तत्काल निलंबित किया जाए तथा मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे इस मामले को न्यायालय, राज्य व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा अनुसूचित जनजाति आयोग तक ले जाने और एक सप्ताह के भीतर कोई कानूनी कार्यवाही अगर विभाग के द्वारा नही किया गया तो कोयलीबेड़ा क्षेत्र के जनता के साथ मिलकर थाना घेरव करने व आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

थाना प्रभारी निर्मल जांगड़े ने आरोप को बताया निराधार व झूठा

इस मामले में कोयलीबेड़ा थाना प्रभारी निर्मल जांगड़े से बात करने पर उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। थाना प्रभारी ने कहा कि पंचमी के दिन वे अपने स्टाफ के साथ क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से वाहन चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान परमेश्वर ध्रुव अपने दो अन्य साथियों के साथ एक वाहन में सवार होकर वहां पहुंचे। उन्होंने बताया कि वाहन को रोककर जब जांच की गई तो तीनों व्यक्ति शराब के नशे में थे। नियमों के अनुसार उन्हें वाहन जब्त किए जाने की जानकारी देते हुए कहा गया कि वाहन को कोर्ट से नियमानुसार छुड़ाया जा सकता है। इस बात पर वे लोग नाराज हो गए और थाना प्रभारी के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज करने लगे। थाना प्रभारी के अनुसार उक्त व्यक्तियों ने यह भी कहा कि सड़क उनकी है और वे जो चाहें कर सकते हैं। जांगड़े ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए मारपीट और धमकी के सभी आरोप पूरी तरह से गलत और तथ्यों से परे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात नियमों का पालन करवाने के तहत कार्रवाई की जा रही थी।