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विकास की ओर बढ़ते कदम: विधायक विक्रम उसेंडी ने जैतानवागांव और सुरेली नदी पर 8 करोड़ के पुल निर्माण का किया भूमिपूजन

​अंतागढ़। क्षेत्र के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने जा रही है। अंतागढ़ ब्लॉक के जैतानवागांव और सुरेली नदी पर लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वृहद पुल निर्माण कार्य का भव्य शुभारंभ किया गया। क्षेत्रीय विधायक विक्रम देव उसेंडी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस भूमिपूजन कार्यक्रम ने क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिख दी है।


​गोडरी में सजा मुख्य मंच ग्रामीणों में उत्साह
​भूमिपूजन से पूर्व मुख्य कार्यक्रम का आयोजन ग्राम गोडरी में किया गया। यहाँ आयोजित सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि एकत्रित हुए। कार्यक्रम के पश्चात विधायक और अन्य अतिथियों ने जैतानवागांव स्थित नदी तट पर पहुंचकर विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की और पुल निर्माण कार्य की आधारशिला रखी।


​बारिश की दुश्वारियों से मिलेगी मुक्ति
कार्यक्रम को ​संबोधित करते हुए विधायक विक्रम उसेंडी ने कहा कि इन दो प्रमुख नदियों पर पुल न होने के कारण बारिश के दिनों में ग्रामीणों का संपर्क जिला मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से कट जाता था। उन्होंने कहा: ​”पुल का निर्माण होने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।यह पुल विकास की नई जीवनरेखा साबित होगा।”

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से ​मनोरमा मण्डावी अध्यक्ष जनपद पंचायत अन्तागढ़​कुबल सिंह भूसाखरे, उपाध्यक्ष ज.पं. अन्तागढ़, ​जितेन्द्र मरकाम, जिला महामंत्री ​महेश उइके अध्यक्ष भाजपा मण्डल अन्तागढ़, ​रजनी नुरेटी, सरपंच, ग्राम पंचायत गोडरी ​सविता हिड़को सरपंच ग्राम पंचायत कढ़ाईखोदरा, सरिता कुलदीप उपाध्यक्ष जिला महिला मोर्चा, ​चंद्रकला कौशल अध्यक्ष महिला मोर्चा मंडल अंतागढ़, कल्पना जैन मंडल महामंत्री जैन, नगरपंचायत अध्यक्ष राधेलाल नाग, उपाध्यक्ष अमल सिंह नरवास, इरफान खान, प्रतिक ठाकुर, महावीर ठाकुर, मोनू साव,सिंह सर, शांडिल्य, वासनिकर सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। ग्रामीणों ने इस सौगात के लिए शासन-प्रशासन और विधायक के प्रति आभार व्यक्त किया। पुल निर्माण कार्य प्रारंभ होने से ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है, क्योंकि अब उन्हें बरसात के चार महीनों में उफनती नदियों को पार करने के जोखिम से स्थायी राहत मिल जाएगी।