बड़ी कार्रवाई की मांग: अंतागढ़ में ‘चौथे स्तंभ’ का हल्लाबोल
वर्दी की धौंस के खिलाफ सड़क पर उतरे मीडियाकर्मी; थाना प्रभारी को हटाने की मांग पर अड़े, अनिश्चितकालीन धरना शुरू
अंतागढ़ : लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीच का गतिरोध अब चरम पर पहुँच गया है। अंतागढ़ थाना प्रभारी के कथित दुर्व्यवहार और तानाशाही रवैये के खिलाफ ‘अंतागढ़ पत्रकार संघ’ ने मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पत्रकारों का साफ़ तौर पर कहना है कि जब तक आरोपी थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से पद से नहीं हटाया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। यह लड़ाई अब आर-पार की है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ समय से अंतागढ़ थाना प्रभारी का रवैया मीडिया कर्मियों के प्रति बेहद संवेदनहीन, अभद्र और तानाशाही पूर्ण रहा है। पत्रकारों का आरोप है कि कर्तव्य पालन के दौरान थाना प्रभारी द्वारा लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये से क्षुब्ध होकर पूरे पत्रकार संघ को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा। बतादें की किसी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शिकायत दर्ज कराने अंतागढ़ थाना पहुंचे हुए थे। इसी दौरान मामले की जानकारी लेने पत्रकार संघ के अध्यक्ष जावेद खान सहित अन्य पत्रकार भी थाना पहुंचे। थाना प्रभारी रमेश जायसवाल द्वारा थाना परिसर स्थित कार्यालय में बैठने को लेकर पत्रकार संघ अध्यक्ष से आपत्तिजनक शैली में टिप्पणी की गई, जिसे पत्रकारों ने दुर्व्यवहार बताते हुए नाराजगी व्यक्त की। घटना के विरोध में पत्रकार संघ के सदस्य थाना परिसर के सामने धरने पर बैठ गए और मामले पर आपत्ति दर्ज कराते हुए थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित कर हटाते हुए उचित कार्रवाई की मांग की गई है ।

धरने पर बैठे पत्रकारों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:
“अगर समाज को आईना दिखाने वाले और जनता की आवाज़ उठाने वाले मीडिया कर्मियों के साथ ही पुलिस का ऐसा बर्ताव रहेगा, तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद पूरी तरह भगवान भरोसे है। वर्दी की धौंस दिखाकर प्रेस की आज़ादी और उसकी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।”
अंतागढ़ पत्रकार संघ ने दोटूक शब्दों में प्रशासनिक अमले को चेतावनी दी है कि यह धरना किसी भी सूरत में तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक थाना प्रभारी पर निलंबन या स्थानांतरण की गाज नहीं गिरती। क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी पत्रकारों के इस कदम का नैतिक समर्थन करना शुरू कर दिया है।
अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पुलिस महकमे के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इस गंभीर विवाद पर क्या संज्ञान लेते हैं और अंतागढ़ में उपजे इस बड़े जनाक्रोश को शांत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
वहीं इस विषय पर थाना प्रभारी का कहना है कि एक एफआईआर के मामले में कुछ पत्रकार साथी कवरेज के लिए थाने आए हुए थे,जहां पत्रकार संघ के अध्यक्ष का बैठने का तरीका मर्यादापूर्वक नहीं था उन्होंने उन्हें बस इसी बात के लिए टोका था किसी तरह का गलत व्यवहार नहीं किया गया है।

