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जनता की पीड़ा का रास्ता बन चुका है अंतागढ़-रेलवे स्टेशन मार्ग

सैकड़ो लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी खतरे में, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

अंतागढ़। अंतागढ़ से रेलवे स्टेशन जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसे देखकर किसी भी जिम्मेदार तंत्र की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों ने पूरे मार्ग को खंडहर में तब्दील कर दिया है। इस मार्ग से प्रतिदिन रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्री, स्कूली छात्र-छात्राएं, कर्मचारी, व्यापारी और आम नागरिक भारी परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। सालों से सड़क की दुर्दशा बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों ने मानो आंखें मूंद रखी हैं। इधर बारिश के मौसम बिल्कुल दस्तक देने ही वाली है जिसमें सड़क में बने बड़े-बड़े गड्ढों में जलभराव से तालाब बनना निश्चित है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो बड़े दुर्घटना से इंकार नही किया जा सकता। वहीं सबसे अधिक परेशानी उन स्कूली बच्चों और रेल मे सफर करने वाले यात्रियों को होती है जो रोज इसी मार्ग से स्कूल और कोचिंग के लिए आवागमन करते हैं। कई बार बच्चे और दोपहिया वाहन चालक सड़क पर फिसलकर घायल हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।

सड़क की दुर्दशा से आटो चालकों में भी भारी रोष है जो कि प्रतिदिन इस कंडम मार्ग से यात्रियों को रेलवे स्टेशन से लाना ले जाना करते हैं। वहीं स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस मार्ग पर रोजाना सैकड़ों की संख्या में भारी मालवाहक वाहन और माइन्स की गाड़ियां गुजरती हैं, जिनके कारण सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। माइंस प्रबंधन व ठेकेदार द्वारा माल ढुलाई कर करोड़ों कमाई कर रहे हैं लेकिन सड़क की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई ही होती है। सड़क की दुर्दशा इस कदर है कि कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को दोगुना समय लग रहा है नागरिकों का कहना है कि जब चुनाव आते हैं तो विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इस सड़क की बदहाल तस्वीर बयां कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम जनता इस उपेक्षा का शिकार होती रहेगी? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी? क्या जनप्रतिनिधियों को जनता की तकलीफ दिखाई नहीं दे रही है क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग की तत्काल मरम्मत कर स्थायी समाधान किया जाए। लोगों का कहना है कि अब आश्वासनों का नहीं, बल्कि धरातल पर काम दिखाने का समय है।

जनता का सीधा सवाल —
“क्या सड़क पूरी तरह खत्म हो जाने और किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा, या फिर आम जनता की पीड़ा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की जाएगी?”

क्षेत्रवासियों की मांग:

सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए।, भारी वाहनों के आवागमन पर नियमन किया जाए।, स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण कराया जाए।, दुर्घटना रोकने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएं।