कांकेर के कोयलीबेड़ा में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा,18 पंचायतों ने सरकारी दफ्तरों में जड़े ताले, चक्काजाम जारी

कोयलीबेड़ा (कांकेर)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। अपनी ७ सूत्रीय (अधिकारियों के अनुसार १० सूत्रीय) मांगों को लेकर पिछले तीन दिनों से आंदोलन कर रहे १८ पंचायतों के ग्रामीणों ने उग्र रुख अपनाते हुए जनपद पंचायत समेत कई प्रमुख सरकारी कार्यालयों में तालाबंदी कर दी है। इसके साथ ही क्षेत्र में चक्काजाम कर आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया गया है।

सुशासन के दावों की खुली पोल, सड़कों पर उतरे आदिवासी
कभी माओवाद प्रभावित और विकास से अछूते रहे इस क्षेत्र में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार भले ही बस्तर में सुशासन और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र के सांसद और विधायक उनकी लगातार अनदेखी कर रहे हैं।

डिस्ट्रीक्ट मिनरल फंड (DMF) में बंदरबांट और बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) और सीएसआर (CSR) फंड की राशि का सही इस्तेमाल न करके उसमें भारी बंदरबांट की जा रही है। क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है। इसके अलावा, कोयलीबेड़ा के ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ (स्कूल) को पखांजूर शिफ्ट किए जाने के सरकारी फैसले का भी जनता द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

मुख्य मांग: कोयलीबेड़ा से ही संचालित हों सभी सरकारी कार्यालय
इस पूरे आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग यह है कि यदि विकासखंड का मुख्यालय कोयलीबेड़ा है, तो ब्लॉक स्तर के सभी कार्यालय सप्ताह के सातों दिन यहीं से संचालित होने चाहिए। वर्तमान में अधिकांश कार्यालयों का संचालन पखांजूर से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
“प्रशासन के साथ चर्चा रही विफल, आंदोलन रहेगा जारी”
“आज एडीएम साहब और प्रशासन की टीम चर्चा करने आई थी, लेकिन इस बातचीत से कोई भी सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जब तक स्थानीय जनप्रतिनिधि (सांसद-विधायक) और जिला प्रशासन के आला अधिकारी एक साथ बैठकर हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते, तब तक हमारा यह आंदोलन और चक्काजाम यथावत जारी रहेगा।” > — बसंत ध्रुव, आदिवासी नेताक्या कहता है प्रशासन?
इस मामले पर अतिरिक्त कलेक्टर अंतेगढ़, अंजेर सिंह पैकरा ने बताया कि १८ पंचायतों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी मांगें रखी हैं।
“ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि विकासखंड मुख्यालय कोयलीबेड़ा होने के कारण सभी कार्यालयों का संचालन सातों दिन यहीं से होना चाहिए, जो कि फिलहाल पखांजूर से हो रहा है। प्रशासन मामले को सुलझाने और व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहा है।”फिलहाल, वार्ता विफल होने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और भारी संख्या में ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

