चितालंका के शिव मंदिर परिसर में जन शिक्षण संस्थान ने किया वृहद पौधारोपण
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पर्यावरण संरक्षण का संदेश: काजू, कटहल, आंवला और बादाम सहित रोपे गए कई फलदार व छायादार पौधे; नियमित देखभाल का लिया संकल्प

चितालंका।
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर स्थानीय चितालंका स्थित शिव मंदिर परिसर में जन शिक्षण संस्थान (JSS) द्वारा एक विशेष पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘हरित पर्यावरण’ को बढ़ावा देना और आम जनमानस में प्रकृति के प्रति जागरूकता पैदा करना था। कार्यक्रम में संस्थान के स्टाफ और प्रशिक्षणार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश दिया।

विविधता से भरपूर रहा पौधारोपण
परिसर को हरा-भरा और भविष्य में उपयोगी बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रजातियों के पौधों का चयन किया गया। इसमें मुख्य रूप से शामिल थे:

- फलदार पौधे: काजू, कटहल, आंवला, नींबू और आम।
- औषधीय व पोषण युक्त पौधे: मुनगा (सहजन)।
- छायादार पौधे: बादाम।
संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि इन पौधों के बड़े होने से न केवल मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और पक्षियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

“पौधे लगाना केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। हमें सिर्फ पौधा लगाना नहीं है, बल्कि उसे एक पेड़ बनते तक संभालना भी है।”
— जन शिक्षण संस्थान प्रबंधनकेवल रोपण नहीं, संरक्षण का भी लिया संकल्प
अक्सर देखा जाता है कि लोग पौधे लगाकर भूल जाते हैं, लेकिन जन शिक्षण संस्थान के इस आयोजन में एक नई मिसाल पेश की गई। पौधारोपण के पश्चात उपस्थित सभी स्टाफ सदस्यों और प्रशिक्षणार्थियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे रोपे गए पौधों की नियमित रूप से देख-रेख करेंगे, उन्हें समय पर पानी देंगे और मवेशियों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
प्रशिक्षणार्थियों में दिखा भारी उत्साह
कार्यक्रम के दौरान जेएसएस के प्रशिक्षणार्थियों में गजब का उत्साह देखने को मिला। उन्होंने न केवल गड्ढे खोदने और पौधे लगाने में मदद की, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नारे लगाकर लोगों को जागरूक भी किया। संस्थान के इस सराहनीय कदम की मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने भी जमकर सराहना की है।

