सांसद-विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी, ‘नींबू काटना बंद करो’ के गूंजे नारे
पिछले एक सप्ताह से धरने पर बैठी जनता की अनदेखी पर बढ़ा आक्रोश
अंतागढ़ /कोयलीबेड़ा। क्षेत्र की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी से आक्रोशित कोयलीबेड़ा की जनता का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। पिछले एक सप्ताह से शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की सुध जब शासन-प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने नहीं ली, तो मंगलवार को आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। उद्वेलित ग्रामीणों ने नगर के दो प्रमुख स्थानों—अंतागढ़-नारायणपुर स्टेट हाईवे (कुहचे मोड़) एवं इमलीपदर मोड़ पर चक्काजाम कर अनिश्चितकालीन जन आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
आवागमन पूरी तरह बाधित, हाईवे पर लगी वाहनों की कतारें
मंगलवार सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा आक्रोश के साथ सड़कों पर उतर आए। आंदोलनकारियों ने कुहचे मोड़ और इमलीपदर मोड़ पर चक्काजाम कर दिया, जिससे अंतागढ़-नारायणपुर स्टेट हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। चूंकि आज नगर का सप्ताहिक बाजार भी है जिसके चलते सड़क के दोनों ओर यात्री बसों, ट्रकों और मालवाहक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के वाहनों के पहिए थम गए हैं। इस चक्काजाम से सप्ताहिक बाजार करने वाले व्यपारी खासे परेशान नजर आ रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूटा गुस्सा
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर जमकर बरसा। ग्रामीणों ने “सांसद-विधायक मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद नेता क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को भूल चुके हैं। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने “निंबु काटना बंद करो” जैसे स्थानीय मुद्दों से जुड़े नारे भी बुलंद किए, जो क्षेत्र में चल रही किसी विशेष प्रशासनिक या ठेकेदारी गतिविधि के प्रति जनता के गहरे विरोध को दर्शाता है।
“प्रशासन ने मजबूर किया सड़क पर उतरने”
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि कोयलीबेड़ा क्षेत्र लंबे समय से सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से महरूम है। अपनी इन्हीं मांगों को लेकर वे पिछले सात दिनों से शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे।
“हमने प्रशासन को जगाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन हमारे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। जब शासन-प्रशासन ने हमारी मांगों पर किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं दिया, तो हमें मजबूरन यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। अब यह आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक हमारी मांगें धरातल पर पूरी नहीं हो जातीं।” — आंदोलनरत ग्रामीण
स्थिति पर प्रशासन की नजर, तनावपूर्ण शांति
चक्काजाम की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड़ मे है फिलहाल शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा है
आक्रोशित ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है हम किसी भी तरह के खोखले आश्वासन को मानने को तैयार नहीं हैं। जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। खबर लिखे जाने तक चक्काजाम और जन आंदोलन लगातार जारी है , जिससे क्षेत्र में भारी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।