56 पंचायतों के सरपंचों का बेमियादी धरना तीसरे दिन भी जारी, सामूहिक इस्तीफा सौंपा
विकास कार्यों की स्वीकृति नहीं मिलने से नाराज सरपंच बोले – “ग्रामीणों को क्या जवाब दें?”
विपक्ष का समर्थन जारी, सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर भी उठे सवाल
अंतागढ : विकासखंड अंतागढ़ में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों को लेकर सरपंच संघ का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। विकासखंड की सभी 56 ग्राम पंचायतों के सरपंच पिछले तीन दिनों से अंतागढ़ के गोल्डन चौक में बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं। धरना आंदोलन के तीसरे दिन सरपंचों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंपते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और पंचायतों में विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाया है वही शनिवार को वृहद चक्काजाम करने का निर्णय आंदोलनरत सरपंचो द्वारा किया गया है।

धरने पर बैठे सरपंचों का कहना है कि पिछले एक वर्ष से ग्राम पंचायतों में कोई नया विकास कार्य स्वीकृत नहीं किया गया है, जिससे पंचायत स्तर पर विकास पूरी तरह ठप हो गया है। उनका आरोप है कि बिना बजट और कार्य स्वीकृति के पंचायतों का संचालन करना मुश्किल हो गया है तथा जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।
सरपंचों ने कहा कि गांवों के लोग लगातार उनसे सवाल पूछ रहे हैं कि उनके कार्यकाल में क्या विकास कार्य हुए हैं, लेकिन कार्यों की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनके पास इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं है। सरपंचों का कहना है कि वे जनता के बीच जवाबदेही की स्थिति में हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नहीं मिलने से उनकी स्थिति असहज हो गई है। धरना स्थल पर मौजूद सरपंचों ने बताया कि पंचायतों में सड़क, नाली, पेयजल, सामुदायिक भवन सहित कई मूलभूत कार्य लंबित पड़े हुए हैं। विकास कार्यों की स्वीकृति नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याएं बढ़ रही हैं और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
आंदोलन को विपक्षी दलों और जनप्रतिनिधियों का भी लगातार समर्थन मिल रहा
इस आंदोलन को विपक्षी दलों और जनप्रतिनिधियों का भी लगातार समर्थन मिल रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि धरना स्थल पहुंचकर सरपंचों की मांगों को जायज बता रहे हैं और पंचायतों को अधिकार एवं संसाधन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
वहीं आंदोलन के बीच स्थानीय विधायक और सांसद की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। धरना स्थल पर मौजूद सरपंचों और ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि पंचायत प्रतिनिधियों के इतने बड़े आंदोलन के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई पहल या हस्तक्षेप सामने नहीं आया है।
सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संघ का कहना है कि पंचायतों के अधिकार, विकास कार्यों की स्वीकृति और ग्रामीण विकास के मुद्दे पर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

