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कभी माओवादियों का गढ़ रहे बिनागुंडा पहुंचे सांसद भोजराज

मोटरसाइकिल से तय किया दुर्गम सफर

कांकेर :छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र स्थित बिनागुंडा गांव, जो कभी माओवादियों (नक्सलियों) का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, अब वहां बदलाव की बयार बहने लगी है। सुरक्षा कारणों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते जहां कभी जनप्रतिनिधियों का पहुंचना लगभग नामुमकिन माना जाता था, वहां अब विकास की नई उम्मीद जगी है। कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज आज मोटरसाइकिल पर सवार होकर इस सुदूर और संवेदनशील गांव पहुंचे।सांसद भोजराज नाग ने गांव तक पहुंचने के लिए बेहद कठिन और कच्चे रास्तों का सामना किया। वे एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर ग्रामीण इलाके की पथरीली और उबड़-खाबड़ राहों से होते हुए बिनागुंडा पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था और सड़क संपर्क में धीरे-धीरे हो रहे सुधार के बीच सांसद का इस तरह सीधे जनता के बीच पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद पल बन गया।

ग्रामीणों ने की विकास की मांग

सांसद के गांव पहुंचते ही स्थानीय ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं एकत्रित हुईं, जिन्होंने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को लेकर सांसद के सामने अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने मुख्य रूप से सड़कों का निर्माण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और पीने के पानी जैसी आवश्यक विकास कार्यों की मांग की। सांसद ने सभी ग्रामीणों की शिकायतें सुनी और विश्वास दिलाया कि उनको हर वो बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी जिसके वो हकदार हैं.

सुरक्षा माहौल में बदलाव का बड़ा संकेत

लोगों का मानना है कि सांसद भोजराज नाग का यह दौरा अबूझमाड़ क्षेत्र में बदलते सुरक्षा माहौल और विकास की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। कभी दहशत के साए में रहने वाले इस इलाके में अब प्रशासनिक और राजनीतिक पहुंच बढ़ने से स्थानीय लोगों का व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा।

माओवादी हिंसा में मारे गए परिवार से की मुलाकात

सांसद ने माओवादी हिंसा में मारे गए मनेश नूरुटी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की.आदिवासी महिला पुनाय नूरुटी ने अपने पति को निर्दोष बताते हुए नक्सली प्रकरण में जेल भेजे जाने की शिकायत की और न्याय की मांग उठाई. गांव की अन्य महिलाओं ने भी जेल में बंद आदिवासियों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की।

हालांकि बिनागुंडा में माहौल बदलता नजर आ रहा है, लेकिन चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी उनके लिए सपने से कम नहीं है. कई बस्तियों तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता है. स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में छोटी बीमारियां भी गंभीर हो जाती हैं, जबकि बच्चों और महिलाओं में कुपोषण अब भी बड़ी समस्या है.सांसद भोजराज नाग ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि इस क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्र की समस्याओं का सर्वे कर योजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए. सांसद ने कहा कि अब समय आ गया है कि क्षेत्र की पहचान नक्सलवाद नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा और जनकल्याण के कार्यों से हो ।