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रावघाट में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: बिना अनुमति 4000 टन लौह अयस्क का अवैध परिवहन का भंडाफोड़

मुख्य बातें

  • मामला: रावघाट लौह अयस्क परियोजना क्षेत्र से बिना अनुमति भारी मात्रा में खनन और परिवहन।
  • मात्रा: लगभग 4000 टन लौह अयस्क अवैध रूप से निकाला गया; 2953 टन रेलवे के जरिए बाहर भी भेजा गया।
  • कार्रवाई: वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर जब्ती पंचनामा तैयार किया, डम्पर और दस्तावेज जब्त।
    अंतागढ़ : रावघाट लौह अयस्क परियोजना एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब बिना किसी वैध अनुमति के भारी मात्रा में लौह अयस्क (Iron Ore) के अवैध उत्खनन और परिवहन का एक बड़ा खेल सामने आया है। वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर छापा मारा और इस अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है।

आरक्षित वन क्षेत्रों से निकाला गया अयस्क

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों ने जब परियोजना क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया, तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई। परियोजना क्षेत्र के ‘ब्लॉक-ए’ के अंतर्गत आने वाले आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 773, 784, 785 और 786 से बिना किसी विधिवत अनुमति के बड़ी मात्रा में लौह अयस्क निकाला जा रहा था। इस अवैध अयस्क को डम्पर्स में लोड करके सरगीपाल स्थित रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया जा रहा था।

आंकड़ों का खेल: 2953 टन अयस्क रेलवे के जरिए बाहर भेजा

स्थल निरीक्षण और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच के मुताबिक:

  • कुल मिलाकर लगभग 4000 टन लौह अयस्क का अवैध परिवहन किया जा चुका था।
  • इसमें से 2953.4 टन अयस्क तो रेलवे के माध्यम से क्षेत्र से बाहर भी भेजा जा चुका है।
  • लगभग 1047 टन लौह अयस्क अभी भी रेलवे स्टेशन परिसर में भंडारित (स्टॉक) पाया गया।

मौके पर डम्पर जब्त, जांच का दायरा बढ़ा

निरीक्षण के दौरान वन विभाग की टीम को मौके पर एक डम्पर मिला, जिसमें लगभग 50 टन लौह अयस्क लोड था। इसके अलावा वहां आठ अन्य डम्पर भी खाली खड़े मिले। अधिकारियों ने बिना देर किए अयस्क, वाहनों और उनसे संबंधित सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया और नियमानुसार जब्ती पंचनामा तैयार किया।

कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी

वन विभाग अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि यह पूरा उत्खनन और परिवहन नियमों, वैधानिक स्वीकृतियों तथा वन संरक्षण प्रावधानों के अनुरूप था या नहीं।

प्रशासनिक रुख: जांच के दायरे में खनन से जुड़े सभी दस्तावेज, परिवहन अनुमति पत्र (Transport Permits), खनन स्वीकृतियां और रेलवे डिस्पैच रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अनियमितता पूरी तरह साबित होने पर वन अधिनियम एवं खनिज अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, रावघाट में खनन गतिविधियों पर प्रशासनिक सतर्कता और निगरानी काफी बढ़ा दी गई है।