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अंतागढ़ : सात सूत्रीय मांगों को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, किसानों से लेकर शिक्षा सड़क एवं जिला बनाने तक के उठे मुद्दे

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अंतागढ़। क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अंतागढ़ को सौंपा गया। ज्ञापन में किसानों की फसल क्षति, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार, बढ़ते बिजली बिल, जल संकट और सड़कों की बदहाल स्थिति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। साथ ही अंतागढ़ को पूर्ण जिला घोषित करने की मांग भी सामने रखी गई।ज्ञापन में कहा गया कि अल्पवर्षा और कीट प्रकोप के कारण क्षेत्र के किसानों की फसल प्रभावित हुई है। ऐसे में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने, फसल बीमा की राशि उपलब्ध कराने तथा किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की गई।शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के जर्जर सरकारी स्कूल भवनों की मरम्मत कराने और शिक्षकों की कमी दूर करने पर जोर दिया गया। प्रत्येक प्राथमिक शाला में कम से कम चार शिक्षकों की नियुक्ति की मांग भी रखी गई, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग

क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी विभागों में रिक्त तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों तथा ग्राम पंचायत सचिव के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई। मांग पत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता देने का मुद्दा भी शामिल रहा।

बिजली बिल और जल संकट का मुद्दा उठा

ज्ञापन में बिजली की बढ़ती दरों और स्मार्ट मीटर से अधिक राशि के बिल आने की शिकायतों का उल्लेख करते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की गई। वहीं, अंतागढ़ उपजिला क्षेत्र में बढ़ते जल संकट के स्थायी समाधान के लिए बड़े जलाशय का निर्माण कराने की आवश्यकता बताई गई, ताकि भविष्य में पानी की समस्या से निपटा जा सके।

सड़कों की हालत सुधारने और जिला बनाने की मांग

क्षेत्र के मुख्य मार्गों और ग्रामीण पहुंच मार्गों की बदहाल स्थिति में सुधार कर आवागमन सुगम बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके अतिरिक्त बातचीत के दौरान अंतागढ़ को पूर्ण जिले का दर्जा देने की बहुचर्चित मांग भी उठाई गई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसानों की समस्याओं, शिक्षा, रोजगार, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन को गंभीरता से पहल करनी चाहिए। अब इन मांगों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर क्षेत्रवासियों की नजर बनी हुई है।