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भैंसासुर में धूमधाम से मनाया गया देव बाल तिहार

धाकड़ीदेवनी दाई के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई पूजा-अर्चना

अंतागढ़। सुरेवाही परगना की परगन डोकरी दाई धाकड़ीदेवनी दाई की परंपरा और आस्था से जुड़े देव बाल तिहार का आयोजन भैंसासुर में पारंपरिक रीति-रिवाज एवं विधि-विधान के साथ धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं एवं समाजजन देवी दरबार पहुंचे और पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

स्थानीय मान्यता के अनुसार भैंसासुर में धाकड़ीदेवनी दाई की आराधना की परंपरा 707 पीढ़ियों से चली आ रही है। बुजुर्गों के अनुसार अंतागढ़ तहसील के सुरेवाही परगना में प्रतिवर्ष पोला पर्व के अवसर पर सबसे पहले धाकड़ीदेवनी दाई के दरबार में देव बाल तिहार मनाने की परंपरा है।

देव बाल तिहार में बघेल परिवार (शोरी), कुंदा, बोकराबेड़ा, कुटाडोकरा सहित आसपास के विभिन्न गांवों से ग्रामीण एवं समाजजन शामिल हुए। देवी दरबार में गायता, सेवादार एवं पुजारी द्वारा पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इस दौरान क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली एवं अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की गई।

आयोजन के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति की मनोहारी झलक देखने को मिली। देवी दरबार में धाकड़ीदेवनी दाई के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता से पूरे आयोजन में उत्साह और उमंग का माहौल रहा।आयोजकों एवं समाजजनों ने कहा कि देव बाल तिहार जैसे आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये क्षेत्र की सदियों पुरानी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम भी हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है तथा समाज में आपसी भाईचारा और एकजुटता मजबूत होती है।