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23 वर्षों से दुर्गम आदिवासी एवं नक्सल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा का समर्पण, डॉ. भेषज रामटेके हुए सम्मानित

विश्व आदिवासी दिवस पर सेवा और समर्पण के लिए मिला सम्मान, कठिन परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ा कर्तव्य का रास्ता

अंतागढ़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अंतागढ़ खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भेषज रामटेके को दुर्गम आदिवासी एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाएं देने और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. रामटेके पिछले 23 वर्षों से आदिवासी एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।उनकी सेवा यात्रा केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे ऐसे दुर्गम इलाकों तक भी पहुंचे, जहां सामान्य परिस्थितियों में पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। विशेष रूप से वर्ष 2005 में अति संवेदनशील क्षेत्र मुल्ले में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का उनका कार्य आज भी उनके साहस और सेवा भावना का उदाहरण माना जाता है।बताया जाता है कि वर्ष 2005 में डॉ. रामटेके नदी-नालों को पार करते हुए पैदल और साइकिल से मुल्ले क्षेत्र पहुंचे और करीब 20 दिनों तक वहीं रहकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। उस दौर में क्षेत्र में नक्सल गतिविधियां बेहद गंभीर थीं और कई लोगों की जान भी गई थी। ऐसे कठिन और भयावह वातावरण में भी उन्होंने क्षेत्र छोड़ने के बजाय जरूरतमंद ग्रामीणों के बीच रहकर उनका उपचार और सेवा कार्य जारी रखा।

जब सैकड़ों नक्सलियों ने घेर लिया था अंतागढ़ क्षेत्र

डॉ. रामटेके के सेवा जीवन का एक और चुनौतीपूर्ण दौर वर्ष 2005 में सामने आया, जब सैकड़ों की संख्या में नक्सलियों द्वारा अंतागढ़ क्षेत्र को घेर लिए जाने की स्थिति बनी थी। उस समय भी उन्होंने भय और असुरक्षा के बावजूद अस्पताल में रहकर मरीजों की सेवा करना जारी रखा। कठिन परिस्थितियों में अस्पताल में उपस्थित रहकर मरीजों और जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना उनके कर्तव्यनिष्ठ रवैये को दर्शाता है।

दुर्गम क्षेत्र के लोगों के लिए बने भरोसे का नाम

पिछले 23 वर्षों में डॉ. रामटेके ने आदिवासी अंचल के ऐसे गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य किया, जहां आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, नदी-नालों, आवागमन की कठिनाइयों और नक्सल प्रभावित वातावरण के बावजूद उन्होंने ग्रामीणों की सेवा को प्राथमिकता दी। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर उन्हें सम्मानित किए जाने से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और क्षेत्रवासियों में भी खुशी का माहौल रहा। यह सम्मान केवल एक अधिकारी का सम्मान नहीं, बल्कि दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान भी माना जा रहा है।डॉ. भेषज रामटेके की 23 वर्षों की सेवा यात्रा यह संदेश देती है कि सच्ची स्वास्थ्य सेवा केवल सुविधासंपन्न क्षेत्रों में काम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद और दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जिंदगी बचाना ही सेवा का वास्तविक अर्थ है।