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विश्व आदिवासी दिवस को लेकर सजा अंतागढ़ का बाजार, हाट-बाजार जैसा दिखा नजारा

पारंपरिक वेशभूषा और आदिवासी आभूषणों की दुकानों पर उमड़ी भीड़, चाट-गुपचुप व विभिन्न खान-पान के ठेलों से बढ़ी रौनक

अंतागढ़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। 9 अगस्त को आयोजित होने वाले विश्व आदिवासी दिवस के जिला स्तरीय कार्यक्रम को लेकर अंतागढ़ का बाजार पूरी तरह सजकर तैयार हो गया है। नगर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में जगह-जगह दुकानें और अस्थायी स्टॉल लगाए गए हैं, जिससे पूरा बाजार पारंपरिक हाट-बाजार जैसा नजर आ रहा है। विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के अंतागढ़ पहुंचने की संभावना के मद्देनजर व्यापारियों ने भी विशेष तैयारियां की हैं। बाजार में कपड़े, पारंपरिक आदिवासी परिधान, आभूषण, खान-पान सहित विभिन्न प्रकार की दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा की दुकानों पर विशेष आकर्षण

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर महिलाओं और युवतियों में पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। इसे देखते हुए बाजार में पारंपरिक परिधानों और आदिवासी श्रृंगार सामग्री की विशेष दुकानें लगाई गई हैं। महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार पारंपरिक पोशाक और आभूषण खरीदती नजर आ रही हैं।आदिवासी संस्कृति की पहचान माने जाने वाले विभिन्न पारंपरिक आभूषण भी दुकानों पर उपलब्ध हैं। इनमें सिर और बालों में सजाने के लिए मोर पंख, कलगी, चोटी का फूल, बालों की चांदी की पिन व अन्य सजावटी सामग्री तथा मांग टीका शामिल हैं।

कान और नाक के पारंपरिक आभूषणों की मांग

महिलाओं के श्रृंगार को पूरा करने वाले पारंपरिक कान के आभूषणों की भी बाजार में अच्छी मांग है। दुकानों में कर्णफूल, झुमका, बाली, कान की लटकन और कानफूल सहित विभिन्न डिजाइन उपलब्ध हैं। इसी तरह नाक में पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषणों में नथ, फुल्ली, लौंग और बड़ी नथनी महिलाओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

चांदी और मनकों की मालाओं से सजी दुकानें

गले के पारंपरिक आभूषणों की भी बाजार में भरमार है। हँसुली, हँसली, चांदी की माला, सिक्कों की माला, मूंगा व मनकों की माला, कंठी और गुलूबंद जैसे आभूषण दुकानों पर सजे हुए हैं। इन पारंपरिक आभूषणों को आदिवासी संस्कृति और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है, जिसके चलते विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर इनकी मांग बढ़ गई है।

चूड़ी, कड़ा और बाजूबंद भी बने आकर्षण

हाथ और बाजू में पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषण भी महिलाओं के बीच पसंद किए जा रहे हैं। बाजार में चूड़ी, कड़ा, बाजूबंद, पहुंची, गोठ अथवा हाथ के पारंपरिक आभूषण और अंगूठियां विभिन्न डिजाइन में उपलब्ध हैं।पैरों के श्रृंगार के लिए पायल, पैजनी, बिछिया, तोड़र-तोड़िया और चांदी की पायल भी दुकानों पर सजाई गई हैं। महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा के अनुरूप इन आभूषणों की खरीदारी कर रही हैं।

खान-पान की दुकानों से बढ़ी रौनक

आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर बाजार में केवल कपड़े और आभूषण ही नहीं, बल्कि खान-पान की दुकानें भी बड़ी संख्या में लगाई गई हैं। होटल, चाट, गुपचुप, मोमोज और विभिन्न प्रकार के नाश्ते की दुकानों के कारण बाजार में खासा चहल-पहल दिखाई दे रही है। ग्रामीण अंचलों से आने वाले लोगों के लिए ये दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।विश्व आदिवासी दिवस के जिला स्तरीय आयोजन के चलते अंतागढ़ में इन दिनों एक ओर जहां आदिवासी संस्कृति, परंपरा और वेशभूषा की झलक देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओ व्यापारियों में भी उत्साह है। नगर का पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आ रहा है।