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माओवाद के साए से निकलकर अब भर्ती की तैयारी में जुटे बस्तर के युवा

अंतागढ़ के उन्मुक्त खेल मैदान में ‘मिशन रक्षक’ के तहत सैकड़ों युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण, पुलिस और सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी पर जोर

अंतागढ़। जिस बस्तर की पहचान कभी माओवाद और हिंसा के साए से होती थी, आज उसी बस्तर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कभी जिन इलाकों में बंदूक का डर युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़ा करता था, वहीं अब युवा अपने हाथों में किताब, खेल सामग्री और भर्ती की तैयारी का सपना लेकर मैदान में उतर रहे हैं। कांकेर पुलिस की ‘मिशन रक्षक’ पहल इस बदलते बस्तर की एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने ला रही है।

अंतागढ़ के उन्मुक्त खेल मैदान में कांकेर पुलिस द्वारा युवाओं को पुलिस एवं विभिन्न सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने के उद्देश्य से निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में अंतागढ़ क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों के सैकड़ों युवा नियमित रूप से हिस्सा ले रहे हैं। सुबह मैदान में पहुंचने वाले युवाओं में उत्साह और अनुशासन साफ दिखाई देता है। कोई दौड़ की तैयारी में जुटा है तो कोई लंबी कूद, ऊंची कूद और गोला फेंक जैसी शारीरिक दक्षताओं का अभ्यास कर रहा है।

पुलिस और सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार हो रहे युवा

‘मिशन रक्षक’ के तहत युवाओं को छत्तीसगढ़ पुलिस, बस्तर फाइटर्स, CAF, CRPF, BSF और अग्निवीर सहित विभिन्न सुरक्षा बलों की भर्ती परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के उन युवाओं को अवसर उपलब्ध कराना है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से निजी स्तर पर भर्ती की तैयारी के लिए प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर पाते।पुलिस द्वारा युवाओं को शारीरिक दक्षता के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकताओं की जानकारी भी दी जा रही है। नियमित अभ्यास के माध्यम से युवाओं की शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें प्रतियोगी परीक्षा के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

मैदान में पसीना बहा रहे युवा

प्रशिक्षण के दौरान 100 मीटर दौड़, 1500 मीटर दौड़, गोला फेंक, लंबी कूद और ऊंची कूद जैसी शारीरिक दक्षताओं का नियमित अभ्यास कराया जा रहा है। प्रशिक्षकों द्वारा युवाओं को दौड़ की तकनीक, समय प्रबंधन, शारीरिक फिटनेस और अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है।इसके अलावा भर्ती परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सामान्य ज्ञान और लिखित परीक्षा की तैयारी को लेकर भी युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इस तरह ‘मिशन रक्षक’ केवल शारीरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को भर्ती की पूरी प्रक्रिया के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।

सुरक्षा से आगे रोजगार और अवसर का माध्यम बनी पहल

अंतागढ़ जैसे क्षेत्र में इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां के बड़ी संख्या में युवा ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों से आते हैं। ऐसे युवाओं को एक स्थान पर निःशुल्क प्रशिक्षण मिलने से उन्हें अपनी क्षमता को पहचानने और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिल रहा है।कांकेर पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को सही दिशा, अनुशासन और अवसर उपलब्ध कराना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और अनुशासन विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

बदले बस्तर की नई तस्वीर

‘मिशन रक्षक’ के प्रशिक्षण मैदान से सामने आ रही तस्वीर बस्तर में हो रहे बदलाव की कहानी कहती है। जिस जमीन पर कभी भय और असुरक्षा का माहौल था, आज उसी जमीन पर युवा अपने भविष्य की दौड़ लगा रहे हैं। उनके चेहरों पर नौकरी पाने की उम्मीद है और आंखों में वर्दी पहनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का सपना।सुरक्षा बलों की मौजूदगी अब केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, प्रशिक्षण और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है।

अंतागढ़ के उन्मुक्त खेल मैदान में चल रहा ‘मिशन रक्षक’ इसी बदलते माहौल की तस्वीर पेश करता है। यह पहल बताती है कि बस्तर में बदलाव केवल सड़कों, भवनों और विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब बदलाव युवाओं की सोच, उनके आत्मविश्वास और उनके सपनों में भी दिखाई दे रहा है। माओवाद के साए से निकलकर अब बस्तर का युवा बंदूक नहीं, भर्ती की तैयारी का रास्ता चुन रहा है—और यही बदलते बस्तर की सबसे बड़ी तस्वीर है।