अंतागढ़: धर्म परिवर्तन और बंजर भूमि पर कब्जे को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश
अंतागढ़। विकासखंड के ग्राम कड़ाईखोदरा में धर्म परिवर्तन और बंजर भूमि के उपयोग को लेकर ग्रामीणों और एक परिवार के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब गहरा गया है। प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने स्वयं मौके पर पहुंचकर भूमि खाली कराने का प्रयास किया। मामला बीते शनिवार का है इस दौरान गांव के प्रमुख जनप्रतिनिधि और समाज प्रमुख भी मौजूद रहे।
धर्म परिवर्तन से शुरू हुआ विवाद
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, गांव के ही एक व्यक्ति सुग्रेश हिड़को पिता केजू राम कुछ समय पूर्व अपने पारंपरिक सनातन/आदिवासी धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था। इसके बाद से ही सामाजिक स्तर पर उसे पुनः अपने मूल धर्म (घर वापसी) में लौटने के लिए लगातार समझाने का प्रयास किया जा रहा था। सामाजिक बैठकों में कई बार समझाइश देने के बावजूद संबंधित व्यक्ति अपने फैसले पर अड़ा रहा, जिससे ग्रामीणों में असंतोष पनप रहा था।
बंजर भूमि पर कृषि कार्य करने का आरोप
विवाद का दूसरा और मुख्य कारण गांव की बंजर भूमि का उपयोग है। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त व्यक्ति द्वारा गांव की सामूहिक बंजर भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर कृषि कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है:* “जब उक्त व्यक्ति ने गांव की सामाजिक रीति-रिवाजों और मूल धर्म को त्याग दिया है, तो उसे गांव की सामूहिक व बंजर भूमि का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है।”
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों द्वारा पूर्व में ही अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय और स्थानीय थाने में लिखित आवेदन देकर उक्त शासकीय/बंजर भूमि को खाली कराने की मांग की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन के रवैये से नाराज होकर अंततः ग्रामीणों ने स्वयं कानून व्यवस्था अपने हाथ में न लेते हुए, सामूहिक रूप से जमीन खाली कराने का फैसला किया और मौके पर पहुंचे।
मौके पर मौजूद रहे ग्राम प्रमुख
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में रही। मौके पर ग्रामीणों की एकजुटता देखने को मिली, जिसमें मुख्य रूप से कोटवार, मंगलूराम कोमरा, गायता, श्यामसिंह हिडको, पटेलपरदेशीराम हिडको सरपंच संपिता हिडको सहित सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।
दूसरे पक्ष का रुख अभी स्पष्ट नहीं
इस पूरे मामले में जहां एक तरफ ग्रामीणों का आक्रोश साफ देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ संबंधित पक्ष (जिस पर आरोप लगे हैं) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से इस विषय पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है।

